भोजपुरी पूर्वी लोक गीत-आइल बिपतिया |

भोजपुरी पूर्वी लोक गीत-आइल बिपतिया |
आइल बिपतिया भइल पागल जईसन मतिया |
नींदिया आवे ना सारी रतिया ,
उपईया कूछ करा मोदी जी |
बहरे ना जाये पाई मन पगलाता |
घरवे मे रही रही कपरा दुखाता |
करत बा कोरोनवा बड़ा ससतिया |
उपईया कूछ करा मोदी जी |
टिकवा लगवली मसकिया पहनली |
जाई जब बजरिया घुंघटा लगवली |
हटावा लोक डाउन माना मोर बतिया |
उपईया कूछ करा मोदी जी |
सगरो सिंगार मोर बेकार होखत बा |
करी का सिंगार पीयवा ना देखत बा |
भगइबा जब कोरोनवा जुड़ाई मोर छतिया |
उपईया कूछ करा मोदी जी |
टीवी सिरीयल देखि मन अनकुसात बा |
पागल खाना जेल खाना घरवा बुझात बा |
माटी लागो इनकर कोरोनवा के जतिया |
उपईया कूछ करा मोदी जी |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक / गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब -9955509286

Comments

12 responses to “भोजपुरी पूर्वी लोक गीत-आइल बिपतिया |”

  1. अतिसुंदर भाव 

  2. राकेश पाठक

    नाइस

    1. Shyam Kunvar Bharti

      thank you

      1. Shyam Kunvar Bharti

        swagat hai

  3. Amita

    बहुत सुंदर भाव

    1. Shyam Kunvar Bharti

      haardik aabhaar

  4. Pragya

    भोजपुरी जबान में बहुत ही सुंदर कविता

    1. Shyam Kunvar Bharti

      aabhaar apka prgya ji

  5. Beautiful poetry 

    1. Shyam Kunvar Bharti

      many many thanks

  6. Ekta

    Very nice

    1. Shyam Kunvar Bharti

      Thank you

Leave a Reply

New Report

Close