5 Comments

  1. भाव बहुत अच्छे हैं। लेकिन व्याकरण की दृष्टि से अशुद्धियाँ हैं। 
    जैसे- 
    ‘सभी उम्मीदें पल में ही टूट गया’
    हिंदी की दृष्टि से यह वाक्य गलत है।
    सही वाक्य है-
    ‘सभी उम्मीदें पल में ही टूट गईं’
    बुरा मत मानना लेकिन साहित्यिक मंच में हिंदी की शुद्धता का ख्याल जरूर रखा जाना चाहिए। 

    1. मैने पंक्तियों के तालमेल से ही ग़ज़ल को पिरोया है। मै मीर, लखनवी, फिराक व अन्य साहित्कारों के शेर व ग़ज़ल को अवलोकन भी किया हूँ। जिस तरह से वे सभी महान शायर अपनी रचना को अंजाम दिए है इससे मैने यह पाया है कि गीत व ग़ज़ल में व्याकरण सौ प्रतिशत मे से दस प्रतिशत ही मान्य रहता है।

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