मधुमास सुहाना आया है
धरती के आँगन में।
रक्तिम कुसुम सजाया है
प्रकृति के माँगन में।।
दुल्हन -सी है सज गई धरती
अम्बर मौर सजाया।
भ्रमर तितलियाँ बने बराती
पर्वत ढोल बजाया।।
संग मयूरी लेकर मोर
छम-छम नाच दिखाया।
“विनयचंद “भी कोयल बन
स्वागत गान सुनाया।
मधुमास सुहाना आया
Comments
9 responses to “मधुमास सुहाना आया”
-
Bahut badhia👌👌👌👏👏👏
-

Nice
-

Sunder
-

Good
-
Nice
-

Nice
-
Nice
-

👌👌👌👌
-
Very Nice
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.