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  1. मनुष्यता सदैव पास रखो पाशविक वृत्तियों को
    पास आने न दो। दया का भाव रखो
    प्रेम की चाह रखो
    ______मनुष्यता के गुण समझाती हुई कवि सतीश जी की बहुत सुंदर प्रस्तुति। उत्तम लेखन

  2. मनुष्य हो तुम
    मनुष्यता सदैव पास रखो
    पाशविक वृत्तियों को
    पास आने न दो।
    दया का भाव रखो
    प्रेम की चाह रखो
    ठेस दूँ दूसरे को
    भाव आने न दो।
    दया पहचान है कि
    आप में मनुष्यता है…
    सुंदर रचना

    जो मानवता सिखलाती है

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