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  1. प्रेम का मानवीकरण कर मानव तथा जैविक प्राणियों में अंतर करने वाला बताया है

  2. प्रेम की बहुत सुंदर व्याख्या की है प्रज्ञा…और प्रेम का मानवीकरण तो सोने पे सुहागा है।प्रेम के बिना सचमुच ही सुखद जीवन नहीं है।
    बहुत सुंदर रचना।

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