मरने की कगार पर पहुँच गये हैं हम
पर लोगों ने आज भी मुझ पर
चिल्लाना नहीं छोंड़ा…
मरने की कगार पर
Comments
4 responses to “मरने की कगार पर”
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बहुत ही उम्दा
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Heart touching lines
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वाह क्या बात है प्रज्ञा जी। मार्मिक संवेदनापूर्ण पंक्तियाँ
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बेहतरीन
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