मस्तानो के टोली (Independence day)

जब झेल रहे थे वीर, सरहद पे दुश्मनों के गोली।
तब चारो दिशाओं में, गूंजा था इंक़लाब की बोली।।
अश्क भर आयी आसमां को, लहू के दरिया देख कर।
न जाने कितने सुहागन, गर्व से अपनी मांग पोंछ ली।।
सभी धर्म कसमे खायी, आज़ादी ही हमारा लक्ष्य है।
खेलेंगे होली जरूर मगर, वह होगी लहू की होली।।
कहीं नरम दल के विचार, कहीं गरम दल के विचार।
यही विचार धारे पे, चल पड़ी थी मस्तानो के टोली।।

Comments

18 responses to “मस्तानो के टोली (Independence day)”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    सुन्दर
    जय हिंद जय भारत
    जय जवान

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद।

  2. Geeta kumari

    जय हिन्द 🇮🇳

    1. Praduman Amit

      समीक्षा के लिए धन्यवाद।

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    शहीदों की शहादत को सलाम। जय हिंद!

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद।

    1. Praduman Amit

      Thanks

  4. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया।

  5. Priya Choudhary

    🇮🇳जय हिंद जय भारती🇮🇳

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया।

    1. Praduman Amit

      Thanks

  6. Satish Pandey

    अति सुन्दर, राष्ट्रवादी विचारधारा को बल देकर देश सेवा के लिए प्रेरित करती वीर रस युक्त पंक्तियों की रचना हुयी है. शिल्प पर भाव की प्रधानता है, वाह

    1. Praduman Amit

      समीक्षा के लिए धन्यवाद पांडे जी।

    1. Praduman Amit

      धन्यवाद।

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