महक रहा है सावन

महक रहा है सावन
सुन्दर सुन्दर कविताओं का आँगन,
और महक आ गई है जब से
हुआ नये कवियों का आगमन।

Comments

3 responses to “महक रहा है सावन”

  1. बिल्कुल सही बात लिखी है आपने। अमिता जी, एकता जी व पाठक जी की बहुत सुंदर कविताओं के रसास्वादन का अवसर प्राप्त हो रहा है। बहुत आनंद की अनुभूति हो रही है।

  2. वाह वाह क्या बात है

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