13 Comments

    1. कविता की इतनी सुंदर और सटीक समीक्षा करने के लिए और कविता का मर्म समझने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद कमला जी हार्दिक आभार

  1. कवि गीता जी की बहुत सुन्दर, और सटीक रचना है यह। लेखनी का अभिवादन। भाव, भाषा व शिल्प का बेहतरीन तालमेल

    1. कविता की सुंदर और सटीक समीक्षा के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी, बहुत-बहुत आभार, अभिवादन सर

  2. महफ़िल का माहौल
    इस कदर न बिगाडिए
    किसी पर यूॅं कीच न उछालिए
    खुद के गिरेबां में
    ग़र झाॅंक सको तो ठीक
    वरना किसी और पर यूॅं,
    तोहमत तो ना लगाइए l

    उत्तम लेखन सही बात कही
    खुद के गिरेबान में झांकने की आवश्यकता होती है दूसरे पर उंगली उठाने से पहले…

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