महबूब की गलियां

मन का घोड़ा ,बेशक़ लंगड़ा
हरदम जाए भागे-भागे।
जन्नत भी फीका लगता है
महबूब की गलियों के आगे।

Comments

5 responses to “महबूब की गलियां”

    1. आभार सहित धन्यवाद जी

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