3 Comments

  1. तन छूट गया न अंत हुआ
    अविनाशी उस आत्मा का।
    विनयचंद रे बनो उपासक
    सत्य पथिक महात्मा का।।
    शास्त्री जी , आपकी लेखनी की इस प्रखरता को प्रणाम, बहुत ही खूबसूरत कविता की सृष्टि की है आपने। महात्मा निश्चय ही उद्धारक महापुरुष थे, उन्हें शत शत नमन।

  2. बापू गांधी जी के बारे में इतने विस्तार से जानकारी दी है ।कविता की लय बद्ध शैली ने बहुत प्रभावित किया है। सत्य, अहिंसा के पुजारी बापू गांधी जी को शत शत नमन ।

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