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  1. माँ के निश्छल प्रेम की कहानी को कविता रूप में बहुत ही सुन्दर तरीके से प्रस्तुत किया है कवि प्रज्ञा जी ने । पुत्र ने भी नादानी में की गई गलती को माँ के निश्छल प्रेम के आगे मान लिया है । बहुत सुंदर

  2. माँ ममता की सागर है यदि संतान लाखो दु:ख दे दे माँ को फिर भी माँ अपने संतान की गलती को कभी भी अपने औलाद के सामने दु:ख व्यक्त नहीं करती। यही आज के संतान क्यों नहीं समझ रहा है। यही अफसोस आज भी उन बेटों का है जो बेटा अपनी माँ के प्रति आज भी सजग है।

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