माँ हीं सबकुछ

वो शब्द कहाँ है शब्दकोष में
जो माँ की महिमा का बखान करे।
शारदे की लेखनी भी माँ बनके
मातृशक्ति का भरसक गान करे।।
माँ स्रष्टा है माँ द्रष्टा है
माँ हीं तो है पालनकारी।
औगुन हरती बच्चों की ये
बन रूद्रों की अवतारी।।
माँ से हीं तो ‘विनयचंद ‘
अग जग में सम्मान बढ़े।।

Comments

3 responses to “माँ हीं सबकुछ”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    मां की महिमा अपरम्पार 🙏

  2. मां स्वयं में संसार है और उस अनुसार का इतना सुंदर वर्णन कवि के द्वारा किया गया है की मेरे पास शब्द ही नहीं है

  3. Satish Pandey

    बहुत खूब शास्त्री जी

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