माँ

ममता के आइने मे प्यारी सी सूरत है माँ,
सूरज की धूप मे छाया का आँचल है माँ,
दुखों के समन्दर में सुख का किनारा है माँ,
दुनियॉ की भीड़ में सकून का ठिकना है माँ,
अँधेरी कोठरी में रौशनी का उजाला है माँ,
प्रेम और स्नेह में प्रकर्ति की गोद है माँ।
बेमोल अलंकारों में अनमोल नगीना है माँ,
निराकार भगवान की साकार प्रतिमा है माँ॥
राही#

Comments

7 responses to “माँ”

  1. Kumar Bunty Avatar
    Kumar Bunty

    SHBDO KA ACHHA BYAAN…

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

  3. Abhishek kumar

    Nice

  4. Satish Pandey

    वाह

  5. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत ही उम्दा

  6. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर पंक्तियां

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