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वीणावादिनी मां पद्मनिलया,
ज्ञान का दीप जला देना,
तिमिर मिटे अज्ञानता का,
मां पथ आलोकित कर देना।
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श्वेतवस्त्रा मां सुरवंदिता,
आन कंठ सुर भर देना,
शीश नवाऊं तेरे चरणों में,
वरद हस्त सिर रख देना।
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रहूं सदा कर्तव्य पथअग्रसर,
मां सत्य मार्ग दिखला देना,
विनती सुनो हे! मातु हमारी,
साहस,शील हिय भर देना।
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स्वरचित मौलिक रचना
✍️…अमिता गुप्ता
मां शारदे स्तुति
Comments
7 responses to “मां शारदे स्तुति”
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बहुत खूब
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आपका सादर आभार सर
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बहुत ही खूबसूरत पंक्तियां लिखी हैं आपने अमिता जी
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बहुत सुंदर रचना
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समीक्षा हेतु आपका सादर आभार दीदी
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मां शारदे को नमन
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आपका सादर आभार
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