मां सरस्वती

हे मां शारदे करो मेरा अभिनन्दन स्वीकार,
अज्ञानता को दूर कर करो मातृ हम पर उपकार।
हाथ जोड़ विनती करूं शीश झुका करूं प्रणाम,
नव कण्ठ स्वर चेतना का भर दो मां शारदे भण्डार।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

Comments

4 responses to “मां सरस्वती”

  1. त्रुटियाँ हैं पर भाव अच्छे हैं

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