माता – पिता

पिता बरगद का साया है,
मां ममता की छाया है।
जीवन में दोनो ही का,
स्नेह मैंने पाया है।
एक भी ना हो जीवन में,
वो जीवन किसको भाया है।
जहां मां का दिल कोमल सा,
बोली मीठी है , कोयल सी।
नारियल सा पिता दिखता,
हमेशा सख्त ही कहता है।
पर भीतर से नर्म है वो,
सारे दुख खुद ही सहता है।
किसी के भी जीवन में,
ज़रूरी है दोनों का साथ,
बना रहे मां का आंचल भी,
बना रहे पिता का सिर पर हाथ।

Comments

16 responses to “माता – पिता”

  1. Prayag Dharmani

    बेहद संजीदा रचना

    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏

  2. Satish Pandey

    अतीव सुन्दर, बोधगम्य, सरल और सुन्दर शब्दों में माता-पिता के स्नेहमयी व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला है। बहुत ही सुंदर लिख रही हैं, आप, वाह

  3. Geeta kumari

    बहुत बहुत आभार,
    आपकी प्रेरणादायक समीक्षा बहुत ही उत्साहवर्धन करती है।
    आपका हार्दिक धन्यवाद 🙏

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar

    माता- पिता के निस्वार्थ प्रेम की भावनाओं को प्रकट करती हुई बेहतरीन प्रस्तुति

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया,आभार🙏

  5. Bahut Khoob, Bahut Sundar

    1. Geeta kumari

      बहुत शुक्रिया इन्दु जी🙏

  6. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका🙏

  7. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव
    अतिसुंदर उपमा अलंकार से अलंकृत काव्य

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏

  8. उम्दा प्रस्तुति

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  9. Piyush Joshi

    वाह, उम्दा लेखन

    1. Geeta kumari

      Thanks Allot Piyush ji 🙏

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