सज़ा

हमने कभी बयां नहीं किया,
आदत नहीं थी गम बताने की।
वो भी नहीं समझे दर्द मेरा,
यही सज़ा मिली गम छिपाने की।

Comments

16 responses to “सज़ा”

  1. सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

  2. बहुत बढ़िया

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद जी 🙏

  3. क्या बात है, वाह, बहुत सुंदर पंक्तियाँ,

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया आपका 🙏

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏

  4. Geeta kumari

    बहुत शुक्रिया जी 🙏

  5. क्या बात है

  6. Geeta kumari

    बहुत शुक्रिया

  7. Piyush Joshi

    वाह जी वाह

  8. Geeta kumari

    बहुत बहुत शुक्रिया पीयूष जी

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