हमने कभी बयां नहीं किया,
आदत नहीं थी गम बताने की।
वो भी नहीं समझे दर्द मेरा,
यही सज़ा मिली गम छिपाने की।
सज़ा
Comments
16 responses to “सज़ा”
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sunder
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सादर धन्यवाद भाई जी 🙏
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बढ़िया
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Thank you
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बहुत बढ़िया
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बहुत बहुत धन्यवाद जी 🙏
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क्या बात है, वाह, बहुत सुंदर पंक्तियाँ,
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बहुत बहुत शुक्रिया आपका 🙏
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बहुत उम्दा
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏
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Waah Waah
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बहुत शुक्रिया जी 🙏
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क्या बात है
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बहुत शुक्रिया
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वाह जी वाह
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बहुत बहुत शुक्रिया पीयूष जी
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