मानवता का मत
हनन करो
ईर्ष्या द्वेष नफरत को
अब दफन करो
ना जाने कब
रुक जाएं यें सांसे ?
अब तो अच्छे
कर्म करो
खुद में जगाकर
मानवता
प्रेम से रहने का
जतन करो
संसार में सुंदर
छवि हो अपनी
इस पर भी
कुछ मनन करो
_✍️ एकता
मानवता

Comments
8 responses to “मानवता”
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मानव जाति को मानव से प्रेम करने तथा ईर्ष्या को भुलाकर मानवता अपनाने को प्रेरित करते सुंदर कविता
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धन्यवाद
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प्रेरक कविता
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धन्यवाद
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बहुत खूब
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सादर आभार
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वाह बहुत खूब
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सादर आभार
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