मापदंड
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कुंठित हृदय से उपजती विषाक्त बेल,
लील जाती है कितनी ही हरी कोपले।
उनको कुचलती कोपलों से निकली,
दर्दनाक चीखों का शोर दब जाता है फाइलों तले।
उस हत्या के साथ पूरे परिवार की ही मौत हो जाती है।
नहीं देख पाती हैवानियत…..
इस कठोरता को।
मानसिक दंश झेलते रोते बिलखते परिवार,
और उनकी दुर्दशा को भुनाते अपनी टीआरपी बढ़ाते न्यूज़ चैनल्स …
इंसान की संवेदनाओं की न्यूनता का मापदंड है।
निमिषा सिंघल
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