माया

सुंदर सपना की तरह, देखा है संसार
आँख खुली कुछ भी नहीं, लीला अपरम्पार
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दुख आकर कहते रहे, ईश्वर है सरकार
मत बनना तुम नास्तिक, लेते हैं अवतार

Comments

One response to “माया”

  1. बहुत खूब

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