5 Comments

  1. मित्रता में राम हो
    मित्रता में श्याम हो
    बस अंगुली पकड़ के चलने दो
    दिल में अपने रहने दो,
    सत्य वचन, सत्य के प्रेमी,
    _____________ बहुत सुंदर ,मित्रता पर बहुत सुंदर पंक्तियां लिखी है ऋषि भाई । सावन में फिर से आपका स्वागत है। कविता के बहुत सुंदर शिल्प और भाव हैं।

Leave a Reply