मित्र अपना कह दिया

आपने जब हमें
मित्र अपना कह दिया
यकीन मानिए,
जलवा हमारा बढ़ गया।
अब ये माथा आपका
झुकने न देंगे हम कभी
आपको सिर-माथ पर
हमने सजा कर रख लिया।

Comments

16 responses to “मित्र अपना कह दिया”

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    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      Thank you

  2. Geeta kumari

    वाह सर, मित्र की शान में इतनी सुन्दर और अनूठी रचना…
    कवि श्रेष्ठ की श्रेष्ठ लेखनी…लेखनी को मेरा प्रणाम है सतीश जी ..।

    1. Satish Pandey

      इतनी सुंदर समीक्षा, प्रेरणा और उत्साहवर्धन हेतु सादर अभिवादन। धन्यवाद शब्द आपकी टिप्पणी के सामने कुछ भी नहीं है। प्रणाम

  3. वाह वाह क्या बात है

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद शास्त्री जी

  4. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर भाव

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद जी

  5. वाह पाण्डेय जी

    1. Satish Pandey

      Thank you

  6. अतिसुन्दर

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