आपकी चाहत के तलबगार है
हम।
आओ एक हो जाए हम।।
ढलती गोधूलि , उस पे हवा के झोंके।
उफ,,, रुत भी कहने लगी एक जान है हम।।
मिलन की प्यास

Comments
6 responses to “मिलन की प्यास”
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वाह वाह
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Thanks Pandit jee
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वाह क्या बात है
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बस आपकी समीक्षा हम पर बनी रहे।
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सुन्दर पंक्तियाँ
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शुक्रिया पांडे जी। आपने मेरी रचना को स्तरीय समझा बहुत बहुत धन्यवाद।
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