मीत मेरे

तेरी सूरत पर निर्भर रह कर
नहीं किया था प्यार तुझे
मैंने तेरी सीरत देखी
तभी किया था प्यार तुझे।
सूरत सदा नहीं रहती है
सीरत देती है अंतिम साथ,
तन आकर्षित संबंधों का
अधिक नहीं होता है साथ।
मन से जुड़े हुए रिश्ते ही
हर स्थिति में, होते हैं साथ,
इसीलिये मन जोड़ा तुझसे
अंतिम साँसों तक है साथ।
—— Dr. Satish Pandey

Comments

10 responses to “मीत मेरे”

  1. MS Lohaghat

    वाह क्या बात है, सूरत कुछ भी नहीं सीरत के सामने

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    वाह वाह क्या बात है!!!!!!

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  3. जीवन साथी के साथ संबंधों की बहुत सुंदर व्याख्या…. ख़ूबसूरत रचना

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद जी

  4. Rakhi Gupta Avatar

    आपने बहुत अच्छा लिखा है

    1. Satish Pandey

      बहुत सारा धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      thanks

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