मुक्तक

फूल लताओं को समेट कर रखता मेरा गांव ,
नल कूप को सहेज कर रखता मेरा गांव ,
रिस्ते को मदमस्त खुशहाल रखता मेरा गांव ,
मिट्टी की खुशबू को सहेज कर रखता मेरा गांव ,

महेश गुप्ता जौनपुरी

Comments

7 responses to “मुक्तक”

    1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद जी

  1. Abhishek kumar

    Nice

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