Ma baba ki dulari wo thi

मां बाबा की दुलारी वो थी,
नन्हे कदम जब पडे थे उसके.
आंगन में खुशियां छाई थी,
किलकारियां घर में गूंजी थी,
पायल की घुघरू की खनखन से,
सारा घर आंगन गुंजा था,
देखते ही देखते जाने कब,
वो बड़ी हो गई थी अब,
मां बाबा के मन में चिंता छाई थी तब,
पराई होने की बारी थी उसकी अब.
उसके मन ने कहा था तब,
मैं हूं तेरे जिगर का टुकड़ा बाबा,
मुझको अपने से दूर न करो,
रहने दो मुझे अपने आंगन में,
मैं तेरी ही परछाई हूं बाबा,
ममता से मुझको दूर न करो,
मैं तेरी ही बगिया की फूल हूं |

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12 Comments

  1. सुरेन्द्र मेवाड़ा 'सुरेश' - September 23, 2019, 4:49 pm

    अत्यंत सुंदर

  2. देवेश साखरे 'देव' - September 23, 2019, 5:21 pm

    बहुत खूब

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 23, 2019, 5:44 pm

    वाह बहुत सुंदर

  4. NIMISHA SINGHAL - September 23, 2019, 9:20 pm

    Sunder

  5. Mithilesh Rai - September 24, 2019, 10:59 pm

    उम्दा

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