बरसात हो रही है
मन झूम रहा है ऐसे
ऊँचे ऊँचे पेड़ों की
पंत्तियां
झूम रही हैं जैसे,
रिम झिम छम छम
छम छम छम छम
मुक्तक
Comments
8 responses to “मुक्तक”
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nice
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Nice
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आपके काव्य में ध्वनिसूचक शब्दों की पहल से कविता का नाद सौंदर्य में इज़ाफ़ा हुआ है, आपकी कविता पढ कर निराला जी की कविता ‘झर झर झर निर्झर गिरि सर में’ याद आ गई
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nice
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पत्तियाँ।
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सुन्दर प्रयास
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बहुत खूब, कम कम लिखो, लेकिन जब लिखो, अति सुंदर लिखो, यही होना चाहिए
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Nice
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