मुक्तक

लकड़ी जली, कोयला हुई
कोयला जला, राख रही
अग्नि परीक्षा सीता की
राम जी की साख रही

२७.०९.२०२०

Comments

5 responses to “मुक्तक”

  1. Geeta kumari

    बहुत सुंदर पंक्तियां

  2. बहुत सुंदर पंक्तियां
    कम शब्दों में बहुत गहरे भाव

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