मुसीबत आई

जब मुसीबत आई तो मैंने ये नहीं सोंचा
कि ‘अब कौन काम आएगा’
बल्कि यह सोंचा कि देखती हूँ
अब कौन साथ छोंड़ जाएगा..

Comments

8 responses to “मुसीबत आई”

  1. बहुत खूब, सुन्दर अभिव्यक्ति

  2. Geeta kumari

    कवि प्रज्ञा जी की कविता में बहुत ही गहराई और सच्चाई छिपी हुई है
    मुसीबत में कोई साथ छोड़ दे तो कैसा अपनापन ।
    वाह ,बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ।

    1. धन्यवाद दी

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