7 Comments

  1. “नींव संवेदनहीनता की रेत लालच की
    ईंट भ्रष्टाचार की सीमेंट बेईमानी का”
    बहुत सही लिखा है अनु जी लालच और भ्रष्टाचार और बेईमानी यही सब मिलकर बनाई थी वह दीवार जिसमें मासूम लोग दब कर मर गए। बहुत ही सटीक चित्रण

  2. कवि अनु जी की कविता, यथार्थ की सच्ची अभिव्यक्ति है। काव्य के मानदंड पर खरी उतरती रचना है यह। मनुष्यता की पीड़ा की अनुगूंज इस कविता में सुनाई दे रही है। आज सर्वाधिक पतन इंसानियत का ही हुआ है। लालच की खातिर वह घटिया निर्माण करता है, जिससे मासूम लोग दब कर काल का ग्रास बन जाते हैं। यह कविता सच्चाई को प्रखर रूप से सामने लाने में सफल हुई है। बहुत खूब

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