मेघा आए रे

मेघा आए रे आए रे,
ऐसी पड़ी फुहार।
भीगी मेरी कॅंचुकी,चुनरिया
नीर गिरे भरमार।
श्याम वर्ण के मेघा बरसे,
खूब गिरी जल-धार।
इतनी तो होली पर भी ना भीगी,
जितनी भीगी बारिश में इस बार।
मोर भी नाचे कोयल भी कूके,
बादल गाऍं राग मल्हार॥
____✍गीता

Comments

4 responses to “मेघा आए रे”

  1. बहुत ही उत्तम प्रस्तुति

  2. बहुत-बहुत धन्यवाद इंद्रा जी

  3. मेघा आए रे आए रे,
    ऐसी पड़ी फुहार।
    भीगी मेरी कॅंचुकी,चुनरिया
    नीर गिरे भरमार।
    —- कवि गीता जी की बहुत ही सुरम्य रचना । वाह

    1. Geeta kumari

      उत्साहवर्धन और सुंदर समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

Leave a Reply

New Report

Close