है सपना कुछ कर जाने का
दुनिया में छा जाने का
बेमोल जिन्दगी को
अनमोल बना दिखलाने का
हैं मुट्ठी भर अरमान मेरे
जग में छा जाने का
कौशल है
यदि ठान लिया कुछ करना है!
तो मेरे कदमों नीचे भूतल है
प्रज्ञा’ नहीं है यूँ ही नाम मेरा
मुझमें सचमुच प्रज्ञा है
जो ठाना करके दिखलाया
मेरा प्रण तो भीष्म प्रतिज्ञा है….
*मेरा प्रण तो भीष्म प्रतिज्ञा है*
Comments
3 responses to “*मेरा प्रण तो भीष्म प्रतिज्ञा है*”
-

This comment is currently unavailable
-
बहुत खूब, अतिसुन्दर
-
बहुत खूब
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.