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  1. कवि गीता जी की इस कविता में उच्चस्तरीय संवेदना है। इतनी शानदार कविता है यह कि तारीफ में शब्द कम पड़ रहे हैं। संवेदना औऱ शिल्प का अदभुत समन्वय है। भाषा जनोन्मुखी है। वाह वाह, एक श्रेष्ठ कवि की श्रेष्ठ कविता।

  2. किसी की सिसकियां सुनती थी अक्सर,
    कोई दिखाई ना देता था।
    देखा करती थी इधर-उधर,
    व्याकुल हो उठती थी मैं,
    लगता था थोड़ा सा डर।
    एक दिन मेरा मन मुझसे बोला..

    अपने मन की व्यथा सुनाती कवि गीता जी की शानदार रचना

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