मेरा हृदय बोला….

किसी ने कहा
लिखा करो
किसी ने कहा पढ़ा करो
यूं वक्त ना जाया करो
कविता तो बाद में भी लिखी
जा सकतीं हैं
वक्त रहते पढ़ा करो..

मेरा हृदय बोला दुनिया की
कब तक सुनोगी
कुछ अपने मन की भी किया करो…

Comments

10 responses to “मेरा हृदय बोला….”

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    1. Pragya Shukla

      Tq

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    1. Pragya Shukla

      आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

  4. बहुत बढिया लिखा है आपने

    1. बहुत-बहुत आभार

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