मेरी छः महीने की गुड़िया
आज लगी है स्वयं पलटने,
हूँ, हाँ, करती, हाथ उठाती
धीरे-धीरे लगी समझने।
अगर गोद मे नहीं उठाओ
तो लगती थोड़ा सा रोने,
प्यारी सी लोरी गाते ही
मीठी नींद में लगती सोने।
मम्मी का दुद्दू पीती है,
दादी की गोदी सोती है,
दीदी की चीजों को झट से
अपने हाथों में लेती है।
जिज्ञासा हर चीज में उसकी
सब कुछ मुँह में ले जाती है,
इधर घुमाओ, उधर घुमाओ
नहीं घुमाओ तो रोती है।
मेरी छः महीने की गुड़िया
Comments
18 responses to “मेरी छः महीने की गुड़िया”
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Very nice
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Thank you ji
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बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ लिखी हैं आपने, इस लेखनी को सलाम है।
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Thanks ji
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बेहतरीन प्रस्तुति
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सादर धन्यवाद
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बहुत सुंदर भाव
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सादर आभार सर
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Atisunder
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बहुत सारा धन्यवाद
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शानदार, लेखनी
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सादर धन्यवाद
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Nice
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Thanks
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Khubsurat kavita
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Thanks
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बहुत खूब
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Thanks
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