मेरी छः महीने की गुड़िया

मेरी छः महीने की गुड़िया
आज लगी है स्वयं पलटने,
हूँ, हाँ, करती, हाथ उठाती
धीरे-धीरे लगी समझने।
अगर गोद मे नहीं उठाओ
तो लगती थोड़ा सा रोने,
प्यारी सी लोरी गाते ही
मीठी नींद में लगती सोने।
मम्मी का दुद्दू पीती है,
दादी की गोदी सोती है,
दीदी की चीजों को झट से
अपने हाथों में लेती है।
जिज्ञासा हर चीज में उसकी
सब कुछ मुँह में ले जाती है,
इधर घुमाओ, उधर घुमाओ
नहीं घुमाओ तो रोती है।

Comments

18 responses to “मेरी छः महीने की गुड़िया”

  1. बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ लिखी हैं आपने, इस लेखनी को सलाम है।

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बेहतरीन प्रस्तुति

    1. सादर धन्यवाद

  3. बहुत सुंदर भाव

    1. सादर आभार सर

  4. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    Atisunder

    1. Satish Pandey

      बहुत सारा धन्यवाद

  5. शानदार, लेखनी

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  6. Piyush Joshi

    बहुत खूब

    1. Satish Pandey

      Thanks

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