मेरी सखियां..

मेरी क्या मजबूरियां हैं
कैसे बताऊं तुम्हें!
मेरी सखियां भी कहती हैं
तुम बात क्यों नहीं करती …

Comments

17 responses to “मेरी सखियां..”

  1. वाह वाह, बहुत खूब, इस काव्य प्रतिभा को सैल्यूट है।

    1. धन्यवाद
      भाई

  2. क्या बात है
    सुन्दर

  3. This comment is currently unavailable

    1. कोई जरूरी नहीं है कि सबको रीप्लाई करूं

  4. बहुत ख़ूब प्रज्ञा जी

  5. अच्छे दोस्तों को जुबानी भाषा की जरूरत नहीं होती
    मायूस आंखों से दर्द की किताब पढ़ लेते हैं

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