16 Comments

  1. ” दिल के जज्बातों को जब जब किया बयां
    एक कविता हर बार हुई”…..बहुत सुंदर प्रज्ञा जी

  2. प्रेम की विकलता का वऱ्णन सराहनीय है
    नव प्रयोग
    आपकी हर रचना चीखकर यही कहती है कि आपको
    उचित संमान मिलना चाहीए

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