मेरे प्रियतम

जिसके थोड़े से दर्द को देखकर
बेचैन हो उठता है यह मन
वही तो हो तुम,
मेरे प्रियतम।
जिसके थोड़े से आँसू देखकर
पसीना पसीना हो जाता है तन
वही तो हो तुम
मेरे प्रियतम।
जिसकी खुशी ही है
मेरे लिए सबसे बड़ा धन,
वही तो हो तुम
मेरे प्रियतम।

Comments

19 responses to “मेरे प्रियतम”

    1. Satish Pandey

      Thanks ji

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  1. वाह क्या बात है

    1. Satish Pandey

      सादर आभार

  2. बहुत बढ़िया

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

  3. सुन्दर अभिव्यक्ति!
    अपनों का दर्द सच में मन को
    बेधित कर जाता है ।

    1. Satish Pandey

      सुन्दर, समीक्षा हेतु हार्दिक अभिवादन जी

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत सुंदर

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद सर

    1. Satish Pandey

      Thanks ji

  5. Geeta kumari

    Very nice

    1. Satish Pandey

      Thanks ji

    1. Satish Pandey

      Thank you ji

  6. Satish Pandey

    बहुत बहुत आभार

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