मैंने रात की दिन से ज़ुदाई लिख दी

हो ज़िन्दगी की बेवफाईयों से खफा

मैंने रात की दिन से ज़ुदाई लिख दी

बचाने को तेरी रुसवाईया जमाने में

ख़ुद की बदनाम कहानी लिख दी

…… यूई

Comments

4 responses to “मैंने रात की दिन से ज़ुदाई लिख दी”

  1. Satish Pandey

    वाह वाह

  2. Beautiful poetry 

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