मैल को धो डालिये

बीज बोना है तुम्हें,
सद्भाव का बो डालिये,
साफ हो मन, साफ हो तन,
मैल को धो डालिये।
यूँ ही मंजिल जीत लेंगे
भ्रम को मत पालिये,
हो सके तो आप हृदय में
मुहब्बत पालिये।
यदि कहीं कोई दुखी
मिल जाये तुम्हें राह में
मान मौका आप उसकी
कुछ मदद कर डालिये।

Comments

7 responses to “मैल को धो डालिये”

  1. बहुत ही शानदार

  2. अति उत्तम काव्य सृजन

  3. अति सुन्दर

  4. बीज बोना है तुम्हें,
    सद्भाव का बो डालिये,
    साफ हो मन, साफ हो तन,
    मैल को धो डालिये।
    यूँ ही मंजिल जीत लेंगे
    भ्रम को मत पालिये,।।

    बहुत खूब उम्दा लेखन

  5. Geeta kumari

    बीज बोना है तुम्हें,
    सद्भाव का बो डालिये,…
    यदि कहीं कोई दुखी
    मिल जाये तुम्हें राह में
    मान मौका आप उसकी
    कुछ मदद कर डालिये।
    _________ हृदय में सद्भावना बनाए रखने और दूसरों की मदद करने की प्रेरणा देती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही शानदार रचना सुंदर शिल्प और सुंदर भाव लिए हुए अति उत्तम लेखन

  6. अति सुंदर कविता

  7. अति उत्तम, बहुत श्रेष्ठ रचना

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