मोहन

राधा ने प्रेम किया
मोहन को टूट कर,
फिर भी चले गए मोहन
राधा का दामन छोड़कर।
क्या प्रेम का यही अर्थ है!
क्यों विरह का
सामना करना पड़ता है?
क्यों वेदना की लौ में
मोहब्बत को तपना पड़ता है?

Comments

21 responses to “मोहन”

  1. प्रेम की पराकाष्ठा है

  2. मोहब्बत विरह से ही निखरती है

  3. राधा और मोहन को
    अपना नायक और नायिका बना कर
    प्रेम की पीड़ा की अच्छी अभिव्यक्ति

  4. Khoobsurat Abhivyakti 👍

    1. Abhishek kumar

      🙏🙏

  5. बहुत ही सुंदर पंक्तियां

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