कैसा मंजर यह आया है,
चहुंओर अंधेरा छाया है!
कितने कुलदीपक बुझ ही गए,
कितने परिवार यू उजड़ गए,
गर नहीं सचेते अब भी तो,
उठ सकता सिर से साया है,
चहुंओर अंधेरा छाया है!
कहीं ऑक्सीजन की कमी हुई,
कहीं पल में सांसे उखड़ गई,
यह मृत्यु का तांडव रुके यहीं,
बेबसी से उबरें जल्द सभी,
रुक जाए महामारी अब बस,
जिसने चित्कार मचाया है,
चहुंओर अंधेरा छाया है!
जहां लाड- प्यार हमें मिलता था,
वहीं दूर-दूर हम रहते हैं,
स्पर्श न कर सकते हैं उन्हें,
बरबस आंसू यह बहते हैं,
प्रभु अपने पल में बिछड़ रहे,
यह कैसा दिन दिखलाया है,
चहुंओर अंधेरा छाया है!
ईश्वर से प्रार्थना करती हूं,
महामारी को जल्दी निपटा दो,
दुख के बादल छंट जाए सभी,
आशा की किरण अब दिखला दो,
सब स्वस्थ रहें खुशहाल रहें,
प्रार्थना में मेरी यह समाया है,
चहुंओर अंधेरा छाया है!
मेरी सबसे है अपील यही,
सब घर पर रहो और स्वस्थ रहो,
सब मास्क लगाओ और सभी,
सामाजिक दूरी का पालन करो,
मत करो अवहेलना नियमों की,
इन्हें पालन करने का दिन आया है,
चहुंओर अंधेरा छाया है!
यह कैसा दिन आया है
Comments
10 responses to “यह कैसा दिन आया है”
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सब स्वस्थ रहे सब खुशहाल रहे प्रार्थना में मेरी ये समाया है बहुत ही सुंदर पंक्तियां अमिता जी
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महामारी को जल्दी निपटा दो,
दुख के बादल छंट जाए सभी,
आशा की किरण अब दिखला दो,
सब स्वस्थ रहें खुशहाल रहें,
प्रार्थना में मेरी यह समाया है,।
बहुत ही सुंदर रचना है। घर पर रहे स्वस्थ रहे।🙏🙏🙏🙏 -
कैसा मंजर यह आया है,
चहुंओर अंधेरा छाया है!
कितने कुलदीपक बुझ ही गए,
कितने परिवार यू उजड़ गए,
गर नहीं सचेते अब भी तो,
उठ सकता सिर से साया है,
________ कोरोना बीमारी पर, समसामयिक यथार्थ चित्रण, उत्तम प्रस्तुति -
Beheterin
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👏👏👌👌
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👏👏👍👍
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बहुत ही सुंदर पंक्तियां
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दिल को छू जाने वाली मार्मिक रचना
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बहुत खूब
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Great poem .
Bahoot badhiya
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