यह जीवन जीना जग में साथी..

यह जीवन जीना जग में साथी,
नहीं है सहज सरल।
ज़ालिम यह दुनियाँ है,
पीना पड़ता है गरल।
कोई-कोई ही इस दुनियाँ में,
हॅंसकर साथ निभाता है।
आगे को जाते देख अक्सर,
यह जमाना जल जाता है।
जो साथ निभाते हैं,
वही सच्चे साथी कहलाते हैं।
निकलती है उनके लिए,
सदैव दिल से दुआएँ।
दूर से नमस्ते उनको,
जो आकर दिल दुखाऍं।
पानी के बुलबुले सी,
छोटी सी है ज़िन्दगी
क्यों बैर भाव रखें किसी से,
कर लें प्रभु की बन्दगी॥
_____✍गीता

Comments

4 responses to “यह जीवन जीना जग में साथी..”

  1. Amita Gupta

    यह जीवन जीना जग में साथी,
    नहीं है सहज सरल……बहुत सुंदर रचना

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद अमिता जी

  2. Satish Pandey

    पानी के बुलबुले सी,
    छोटी सी है ज़िन्दगी
    क्यों बैर भाव रखें किसी से,
    कर लें प्रभु की बन्दगी॥
    ——- बहुत ही सुन्दर रचना, लाजवाब प्रस्तुति

    1. Geeta kumari

      उत्साहवर्धन हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

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