किसी को याद करके रोना नही, ऐ दोस्त..
किसी को याद करके मुस्कुराओ ।
वरना शिकायत लगा देगी ,
याद उसी की उसे वापिस आकर ,
वो भी तो रो देगा..
तो कैसा लगेगा बताओ ।
तुम मुस्कुराओगे तो वो भी मुस्कुरा देगा ,
यकीं ना हो तो कभी इसको आज़माओ ।
_______✍️गीता______
याद की शिकायत..
Comments
23 responses to “याद की शिकायत..”
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याद का मानवीकरण किया गया है।
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बहुत ही सुन्दर कविता,nice
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बहुत आभार चंद्रा जी🙏
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वाह बहुत सुंदर भाव पूर्ण रचना
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सादर धन्यवाद भाई जी 🙏
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कमाल की भावाभिव्यंजना, याद के लौट कर आने का खूबसूरत मानवीकरण, कलम को सलाम है। प्रतिभा को अभिवादन है।
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आपकी इस अति उत्साह वर्धक समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद एवम् आभार 🙏🙏
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याद करके मुस्कुराओ …
पंक्तियाँ उच्च कोटि की है-
समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद जी 🙏
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जबरदस्त है
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समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा बहन
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सुन्दर भाव सुंदर पंक्तियां
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समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद जी
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बहुत सुन्दर
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Thanks for your nice complement.
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Great Poem
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Thanks allot to you sir🙏
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अतीव सुन्दर
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बहुत सारा धन्यवाद कमला मैम🙏
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Waah Geeta ji
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Thanks Allot Isha ji
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बहुत खूब
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शुक्रिया इन्दु जी 🙏
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