याद

अपने गली का होने ना दिया,
खुद के घर चैन से सोने ना दिया।
जाते-जाते मुड़ा इस कदर,
मुस्कान मेरा ले गया,
फिर भी मुझे रोने ना दिया।
अपना कह कर अपना बना ना सका,
लाकर छोड़ा इस मोड़ पर,
मुझे किसी और का होने ना दिया।
दुनिया के भीड़ में कहीं गुम हो जाऊं,
ये सोच कर घर से निकली,
उसकी याद ने ऐसे जकड़ा,
कहीं खोने ना दिया ।

Comments

16 responses to “याद”

    1. Kumari Raushani

      Thank you

  1. Kumari Raushani

    Thank you sir

    1. Kumari Raushani

      Thank you sir

    2. धन्यवाद सर

    1. Kumari Raushani

      Thank you

  2. Deovrat Sharma Avatar

    उसकी याद ने ऐसे जकड़ा,
    कहीं खोने ना दिया ।

    खूबसूरत रचना … साझा करने के लिए आपका धन्यवाद

    1. Kumari Raushani

      Thank you sir

  3. Kumari Raushani

    Thank you

    1. Kumari Raushani

      Thanks

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