युद्ध =दोहे

विश्व शांति हो हो जाय अब, बुद्ध होय चहुँ ओर
सुख की वर्षा होय तब,मन ज्यूँ वन का मोर
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युद्ध नहीं समाधान है, समस्याओ का जान
चाहे गीता भगवात, चाहे पढ़े कुरान

Comments

2 responses to “युद्ध =दोहे”

  1. बहुत सुन्दर रचना 

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