ये कौन चित्रकार है
जिसने रंग बिखेरे नभ में
इन रंगों से प्रेरित होकर
गीत आ गए मेरे लब पे
हरे भरे वृक्ष बनाकर
यह सुन्दर संसार रचाया
हृदय में इतना प्रेम भरा क्यूँ,
कोई बिछड़ जाए तो चैन न आया
कैसी यह लीला है तेरी
मानव मन तो समझ न पाया
______✍गीता
ये कौन चित्रकार है
Comments
4 responses to “ये कौन चित्रकार है”
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भावपूर्ण शब्दों में रचित कविता बहुत ही सुन्दर है।
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बहुत बहुत आभार सर
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बहुत सटीक रचना है। दार्शनिक अंदाज है, रहस्य से पर्दा उठाने की आतुरता है। साथ ही साथ हिंदी भाषा के व्याकरण की शुद्धता है। बहुत खूब
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प्रोत्साहित करने और इस लाजवाब समीक्षा हेतु बहुत बहुत आभार सतीश जी..
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