सूखी डाली

सूखी डाली के पहलू में
चाँद पनाह मांग रहा है।
लाचारी है कि वह क्या करे
वक्त भी अपनी रफ्तार में है

Comments

3 responses to “सूखी डाली”

  1. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ

    1. स्वागतम 

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