ये मंच बड़ा मन-भावन है..

दूर – दूर से कवि पधारे,
कोई पर्वतीय, कोई मैदानों से ।
यहां पे आकर , धूम मचा कर,
लिखें बड़े अरमानों से ।
मैं भी आई, नाम है गीता ,
लिख दी मैनें, भी कुछ कविता ।
सब का ही स्नेह मिला,
कुछ प्रमाण-पत्र मिले सम्मानों के ।
सावन मंच को नमस्कार है ,
कोटि-कोटि अभिवादन है ।
गागर में सागर समेटे ,
ये मंच बड़ा मन-भावन है..
हां , ये तो सावन है ।
जी हां, ये सावन है ।।
*****✍️गीता*****

Comments

12 responses to “ये मंच बड़ा मन-भावन है..”

  1. Satish Pandey

    एक सुंदर और लाजवाब अभिव्यक्ति है यह। काव्य सरिता बहाने में सुन्दर योगदान देने वाले सावन मंच के संबंध में सुन्दर अभिव्यक्ति।

    1. Geeta kumari

      बहुत ही सुन्दर समीक्षा की है सतीश जी । सदा ही की तरह बहुत प्रेरणा देती हुई समीक्षा ।आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏

  2. बहुत खूब, बहुत सुन्दर रचना

    1. Geeta kumari

      Thanks for your valuable compliment Joshi ji🙏

  3. बहुत ही बढ़िया रचना

    1. Geeta kumari

      आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏 आभार ।

    1. Geeta kumari

      Thank you Rishi ji

  4. बहुत खूब

    1. Geeta kumari

      बहुत सारा धन्यवाद कमला जी 🙏

  5. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव

    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏 सादर आभार

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